/गोल्ड मेडल लाने की बजाय आखिर क्यों बना अजय गुर्जर डॉन? | Ajay Gurjar Latest News | Rajasthan Samvad

गोल्ड मेडल लाने की बजाय आखिर क्यों बना अजय गुर्जर डॉन? | Ajay Gurjar Latest News | Rajasthan Samvad

कहते है अपराध एक एसा दलदल है जिसमे किसी ने अगर एक बार गलती से पैर रख दिया तो वह कितनी भी कोशिश कर ले बाहर नहीं आ सकता| 
और अगर कोई अपराधियों के साथ रहने लग जाये तो उसकी मानसिकता यानि सोचने और समझने की क्षमता भी बिलकुल अपराधियों की तरह ही हो जाती है|
तो दोस्तों स्वागत है आपका राजस्थान संवाद में और आज के इस विडियो में हम बात करने वाले है एक एसे शक्श की जिसने एक समय दुनिया के 25 से अधिक देशों में भारत का सर गर्व ऊँचा किया था पर आज के समय वो एक कुख्यात अपराधी के रूप में जाना जाता है|
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चलिए विडियो शुरू करते है –
 
 
जी हाँ दोस्तों वो शक्श है अजय गुर्जर जो अगर अपराध की दुनिया में कदम नहीं रखता तो आज के समय वो भारत की ओर से ओलंपिक में भागीदारी करता| 
अजय गुर्जर का जन्म हरियाणा के तुमसरा गाँव में हुआ था| 
बचपन से ही अजय को देश के लिए कुछ करने की इच्छा थी उसका सपना था की वो एक दिन देश के लिए ओलंपिक में गोल्ड मैडल लायेगा| 
अजय गुर्जर के बचपन का ये सपना जवानी की दहलीज में कदम रखने तक अपना रंग दिखा चुका था| 
अजय ने खेल चुना ताइक्वांडो और ताइक्वांडो में अजय की महारत इस कदर हो गयी थी की वो 25 देशों में लगातार एक के बाद एक मैच जीतता गया| कई देशो में गोल्ड और सिल्वर मैडल जीतने के बाद लोगों को लगने लग गया था की भारत का ओलंपिक में एक मैडल तो पक्का हो गया|
आपको बता दें की अजय ने ताइक्वांडो में राष्ट्रीय स्तर पर 8 स्वर्ण पदक जीते थे। उसने वर्ष 2003 में भूटान में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय ताइक्वांडो चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल भी जीता था और वर्ष 2005 में मुंबई में आयोजित एक अन्य अंतर्राष्ट्रीय ओपन चैलेंज प्रतियोगिता में 5वें स्थान पर रहा था।
अब अजय का सपना था ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड लाने का| पर उसका ये सपना साकार होता उससे पहले उसकी पूरी दुनिया ही पलट गयी थी|
बात है 2004 की, एक दिन एक कहासुनी में अजय गुर्जर ने एक व्यक्ति को चाकू मार दिया था। इस मामले में उसे जेल हो गयी। 
जेल में अजय की मुलाकात आपराधिक प्रवृति के लोगों से हुई। 
जेल से बाहर आने पर वह रंगदारी मांगने लगा। अंडरवर्ल्ड से संबंध रखने वाले अजय गुर्जर के चचेरे भाई जेपी गुर्जर ने उसे मुंबई के एक खूंखार गैंगस्टर हाफिज बलूच के पास भेज दिया।
हाफिज बलूच ने साल 2008 में जुबैर पटेल उर्फ कात्या डॉन की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्या के बाद हाफिज बलूच मुंबई से पलवल आ गया और अजय गुर्जर और उसके चचेरे भाई जेपी गुर्जर के घर में रहा। 
जब हाफिज बलूच वापिस मुबई लौटा तो वो अजय गुर्जर को भी साथ ही ले गया| वहां उसकी मुलाकात और गैंगस्टरों से हुई| वहां उनके साथ रहने पर अजय की सोच भी अपराधिक गतिविधियों की तरफ झुक गयी|
यही उसे एक नया नाम मिला भाईजी| 
 
हाफिज ने ही अजय गुर्जर उर्फ़ भाईजी का परिचय दाऊद अब्राहिम के भाई इकबाल इब्राहिम से कराया था।
अब अजय पूरी तरह से अपराध की दुनिया में घुस चुका था और उसका सम्बन्ध अन्तर्राष्ट्रीय डॉन सुभाष ठाकुर और आरिफ जान जो छोटा शकील का बहनोई है  के साथ करीबी संबंध बन चुका था। 
अंडरवर्ल्ड गैंगस्टर अजय गुर्जर ने 2008 से 2018 के बीच हरियाणा और राजस्थान में व्यापारियों, डॉक्टरों, पार्षद, हरियाणा के दो पूर्व मंत्रियों और उनके रिश्तेदारों सहित कई जाने-माने लोगों से रंगदारी मांगी।
अजय ने हरियाणा के पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल के भतीजे, शिवचरण लाल शर्मा, पलवल क्षेत्र के पार्षद चंडी राम गुप्ता पर वर्ष 2012 में जबरन वसूली के लिए गोली चलाई थी। 
रंगदारी मांगने का अजय गुर्जर का अपना अलग तरीका था। 
दरअसल अजय गुर्जर उर्फ़ भाईजी फेसबुक और विडियो कॉलिंग के जरिये रंगदारी मांगने का आदेश देता था। इसके अलावा वह टाइप किया पत्र, मैगजीन, गोलियां व देसी कट्टा मिठाई के डिब्बे में रखकर भेजता था। रंगदारी नहीं देने पर अपने गुर्गों से फायरिंग कराता और फेसबुक या विडियो कॉलिंग के जरिए उसे लाइव देखता था।
 
इसी कारण सन 2018 में उसे गिरफ्तार भी कर लिया गया था और उसे कुछ महीनो की जेल भी हुई। उसने जेल से अपना काम जारी रखा और इसी कारण  उसका नेटवर्क दिल्‍ली, हरियाणा के साथ मुंबई, राजस्थान और यूपी में काफी बढ़  चुका था|
 
जेल से छूटने के कुछ समय बाद ही अजय वापिस से पुलिस की नज़र में आ गया था पर क्यों?
बताएँगे इसी विडियो में पर उससे पहले आपको बता दें की अब तक अजय गुर्जर उर्फ़ भाई जी पर लगभग रंगदारी के दस मामलों समेत हत्या, हत्या का प्रयास, जबरन वसूली, हमला, दंगा व आपराधिक धमकी व हथियार अधिनियम के 24 से अधिक मामले दर्ज हैं।
 
दरअसल अगस्त 2021 में अजय गुर्जर का एक ऑडियो कॉल वायरल हुआ। जिसमें सतेंद्र उर्फ सत्ते अपने सहयोगी अजय गुर्जर से दूसरे गिरोह के एक बदमाश की हत्या को अंजाम देने के लिए एके-47 राइफल की व्यवस्था करने के लिए कह रहा था।
पर उस कॉल में तिहाड़ के एक अधिकारी से बदला लेने की भी बातचीत हुई थी। 
बात एसी थी की अजय और सतेंद्र दोनों का एक साथी अंकित गुर्जर तिहाड़ जेल बंद था| 
और चार अगस्त के दिन अंकित गुर्जर की मौत हो गई थी। मामले में अंकित के परिजनों ने तिहाड़ के अधिकारियों पर पीट-पीट कर हत्या करने के आरोप लगाए थे। आपको बता दें की हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
और अंकित की मौत का बदला लेने के लिए अजय गुर्जर एक अधिकारी को मारना चाहता था|
ऑडियो वायरल होने के बाद सतेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया था पर सतेंद्र की गिरफ़्तारी के बाद अजय गुर्जर उर्फ़ भाईजी अंडरग्राउंड हो गया था पर करीब पांच माह बाद छह जनवरी को पुलिस को सूचना मिली थी कि अजय बदरपुर बस स्टैंड पर आने वाला है। 
अजय के बदरपुर पहुँचने से पहले पुलिस ने अपना जाल बिछाया और घेराबंदी कर अजय गुर्जर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके पास से 5 जिंदा कारतूस के साथ एक सेमी ऑटोमेटिक पिस्तौल बरामद की थी|
आज के समय एक गोल्ड मेडलिस्ट व्यक्ति अपराध की दुनिया में कदम रखने के कारण सलाखों के पीछे है|
आज की इस कड़ी में बस इतना ही| जल्द मिलेंगे एक नयी कहानी के साथ तब तक के लिए धन्यवाद|

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