/जाट भारत का मूलनिवासी या विदेशी ? | JAAT | Rajasthan Samvad

जाट भारत का मूलनिवासी या विदेशी ? | JAAT | Rajasthan Samvad

कई लोगों का सवाल है की जाट जाती भारत कि मूलनिवासी जातियो मे से है या विदेशी जातियो मे से इसका जवाब मै आपको आज इस विडिओ मे बताने वाली हूँ 

नमश्कार आप देख रहें है राजस्थान संवाद ओर मै आज आपको बताऊँगी कि दरहासल जाट जाती के लिए मूलनिवासी या विदेशी शब्द कोई मायने नहीं रखता । जाट दुनिया के हर कोने के लिए मूलनिवासी है । लेकिन जाट वास्तव में एक मध्य ऐशियाई रेस है जो पंजाब, ईरान, इराक, जर्मन, डेनमार्क के रास्ते होते हुए दुनिया भर में फैली जिसके कारण भारत के जाटों को एक इंडो-सीथियन या इंडो-आर्यन ट्राइब कहा जाता है ।

जाट भारत में मुख्यतः उत्तरी भाग में, पुरे पाकिस्तान में, पश्चिमी अफगान में जट के नाम से और ईरान इराक में किसी अन्य नाम से(जो कि dna से साबित हो चूका है) निवास करता है..  लेकिन जाट भारत के लिए पूर्णरूप से मूलनिवासी नहीं है..  क्यूकी जाट पुरे भारत में नहीं है..  तो इसका सीधा सीधा मतलब यही होता है कि जाट एक मध्य ऐशियाई जाति है..  लेकिन जाट जर्मन में भी है डेनमार्क में भी है वहां तो जटलैंड(jutland) नामक देश भी है..  फिर जट सिर्फ मध्य ऐशियाई ट्राइब कैसे हो सकती है । और अगर ज्यादा खोजबीन करे तो हम ये भी पायेगे कि जाट इंडोनेशिया जैसे दक्षिणी देश में भी है..  जाट पूरी दुनियां में मौजूद है इसका तर्क तो बोहत पहले ही मिल चूका है..  इस जाती ने  महाभारत युद्ध में काफी सारी सेनाओं मे भाग लिया और आप पढ़ सकते है कि वोह सेनाएँ कहाँ कहाँ से आयी थी । उनको हम जाट इसलिए बताते है कि उनके जो भी वंश थे वोह आज जाटों में मौजूद है । और जितने भी महान यौद्धा हुए वोह सब जाट थे..  यही कारण है  कि आज दुनियां में सबसे ज्यादा गोत्र या वंश जाट जाति में ही पाए जाते है..  पुराने काल के जो भी वंश है वो आज जाट कौम में गोत्र के रूप में मौजुद है । महाभारत के युद्ध के बाद भारत के जाटों का साम्राज्य काफी समय तक बना रहा..  लेकिन इस युद्ध के बाद ब्राह्मणों ने भी अपने राज्य स्थापित करने शुरू कर दिए । 

 

लेकिन सवाल ये भी है कि जाट अगर भारत का मूलनिवासी है तो वोह सिर्फ उत्तरी भारत में ही क्यू है दक्षिण में क्यू नहीं इसका जवाब ये है कि जाट बौद्धकाल तक पुरे भारत में थे लेकिन उसके बाद ब्राह्मणों की दक्षिण में ज्यादा संख्या होने और बौद्ध धर्म पर अत्याचार के कारण दक्षिण के जाट चीन और इंडोनेशिया की तरफ खिसक गए और उत्तर भारत में जाटों की संख्या ज्यादा थी इसलिए इधर ब्राह्मण ज्यादा सफल नहीं हुए लेकिन unhone जाट कौम को ही तोड़कर राजपूत वर्ग का निर्माण करके यहाँ भी बौद्ध धर्म को ख़त्म कर दिया ।

दूसरी तरफ महाभारत के बाद बाहर गए या वहाँ के(विदेशी) जाटों ने अपनी नस्ल पे ज्यादा ध्यान दिया..  वो धर्मो के चक्कर में बिल्कुल नहीं पड़े । हालांकि इन्होंने ईसाई और इस्लाम धर्म को खूब फैलाया लेकिन अपने डीएनए और नस्ल को शुद्ध बरक़रार रखा यानि अपनी नस्ल से ज्यादा लगाव रखा । आज भले ही दुनियां के अलग अलग हिस्सों में जाट किसी भी नाम से पुकारा जाता हो.. लेकिन सचाई यही है कि ये सब एक ही नस्ल है और इस नस्ल के लोग आज जहाँ भी मौजूद है वे खुद को वहीं के मुलनिवासी मानते है क्यूकी जाट दुनिया की सबसे बड़ी रेस है जो दुनियां के हर कोने में है । इसलिए जाट के लिए मूलनिवासी या विदेशी होने का प्रशन करना ही गलत है । जाट जहां भी है वो वहां का मूलनिवासी है ।

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