/पायलट के पर कतरने के लिए CM गहलोत ने बनाई रणनीति

पायलट के पर कतरने के लिए CM गहलोत ने बनाई रणनीति

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से पहले सीएम गहलोत आक्रामक होते जा रहे हैं। सीएम गहलोत केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर लगातार जुबानी हमला बोल रहे हैं। गहलोत शेखावत के बहाने पायलट को घेर रहे हैं,  क्या है पूरा मामला बताएंगे आपको इस वीडियो में लेकिन इससे पहले अगर अपने हमारा चैनल सब्सक्राइब नहीकिया है तो जरूर कर दीजिए जिससे आपको सारी अपडेट्स समय पर मिल सके ,,,, और इसी के साथ अगर आपको क्रिकेट का शौक है तो आपके लिए अच्छी खबर यह है कि आप इस शौक से पैसे भी कमा सकते हैं जी हां डायमंड एक्सचेंज इंडिया के साथ जोड़कर आप अपने इस शौक को पूरा भी कर सकते हैं और इससे इनकम भी कर सकते हैं और यह कैसे होगा इसके लिए आपको डिस्क्रिप्शन में जाना होगा जहां से आपको सारी जानकारी मिल जाएगी नमस्कार मैं हूं चेतना शर्मा आपके साथ और आप देखना शुरू कर चुके हैं राजस्थान संवाद,,,,,सीएम गहलोत केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पर लगातार जुबानी हमला बोल रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। फोन टैपिंग मामला हो या फिर ईस्टर्न कैनाल प्रोजेक्ट। सीएम गहलोत लगातार गजेंद्र सिंह शेखावत को घेर रहे हैं। सीएम गहलोत भले ही प्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत को घेर रहे हो लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से सचिन पायलट के पर कतरने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। क्योंकि जिन विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप मुख्यमंत्री अशोक गहलोत शेखावत पर लगा रहे हैं उनमें वो भी शामिल हैं जो जुलाई 2020 में सचिन पायलट के साथ नाराज होकर दिल्ली और मानेसर चले गए थे।जानकारों का कहना है कि सीएम गहलोत गाहे-बगाहे फोन टैपिंग और सरकार गिराने का मामला उठाकर कांग्रेस आलाकमा को सियासी संदेश देना चाहते हैं। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गजेंद्र सिंह शेखावत को राजस्थान में कांग्रेस पार्टी में हुई राजनीतिक उठापटक और विधायकों की खरीद-फरोख्त के लिए जिम्मेदार बताते हैं।सीएम गहलोत बार-बार सरकार गिराने का बयान देकर पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को घेरने की रणनीतिक के तौर पर देखा जा रहा है। हाल में पायलट ने नई दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी से मुलाकात की थीं। इस मुलाकात के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जानकारों का कहना कि विधानसभा चुनाव 2023 से पहले कांग्रेस आलाकमान पायलट को बड़ी जिम्मेदारी सौंप सकता है। सीएम गहलोत नहीं चाहते हैं कि प्रदेश में पायलट को बड़ी जिम्मेदारी मिले। गहलोत सरकार के खिलाफ बगावत के बाद से ही पायलट बिना किसी पद के हैं। वरिष्ठता के हिसाब से पायलट के लिए सिर्फ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद ही बचता है। लेकिन फिलहाल सीएम गहलोत अपने करीबी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा को हटाने के पक्ष में नहीं बताए जा रहे हैं। जबकि कांग्रेस आलाकमान प्रदेश कांग्रेस कमेटी में फेरबदल करने के इच्छुक बताया जा रहा है। 

जानकारों का कहना है कि विधानसभा चुनाव तक शेखावत के बहाने सचिन पायलट निशाने पर रहेंगे। उल्लेखनीय है कि सीएम गहलोत ने बीकानेर प्रवास के दौरान एक बार फिर से फोन टैपिंग मामला उठाया था। सीएम गहलोत ने कहा कि शेखावत ने जोधपुर के ही विधायक को मुख्यमंत्री पद से हटाने का षड्यंत्र रच दिया था। जबकि शेखावत भी जोधपुर के ही है। अमित शाह और मोदी के इशारे में मेरी सरकार को गिराने के लिए पूरा ताना-बाना रचा। ये कैसी जलशक्ति मंत्री है जो राजस्थान को कोई प्रोजेक्ट नहीं दिला पाए। जबकि देश में राजस्थान को पानी की सबसे ज्यादा आवश्यकता है। इसके बाद सीएम गहलोत और केंद्रीय मंत्री शेखावत के बीच जमकर ट्वीटर वार हुआ। सीएम गहलोत लगातार अपनी सरकार को गिराने का बयान देकर कांग्रेस आलाकमान को यह संदेश देना चाहते हैं कि कि पायलट को बड़ी जिम्मेदारी देने से परहेज किया। क्योंकि पायलट कभी भी पाला बदल सकते हैं। गहलोत विधानसभा चुनाव तक ईआरसीपी और विधायकों की खरीद फरोख्त का मुद्दा उठाते रहेंगे। इसमें नाम प्रत्यक्ष रूप से केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत का लिया जाएगा लेकिन अप्रत्यक्ष रूप से निशाना सचिन पायलट ही होंगे।

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